छत्तीसगढ़ का राजनैतिक सामाजिक, पुरातत्व एवं सांस्कृतिक वैभव अपने आप में विशेष अध्ययन का विषय है। छत्तीसगढ़ी मुहावरे, जनौला, लोकगीत, चंदेनी, सुवा, पंथी, कर्मा, ददरिया, सुनने – सुनाने, देखने – दिखाने की अपनी अलग-अलग लोक लुभावन प्रस्तुति है। अपनी एक जीवन पद्धत्ति है। व्यवस्थित जीवन पद्धत्ति में गणित का अध्ययन आवश्यक हो जाता है। गणित सभी भाषाओं, कलाओं एवं विज्ञानों की सोलह श्रृंगारों से श्रृंगारित रानी है । गणित की आत्मा अंक है, तो बीज और रेखा इसकी शक्तियाँ है। यह जानकर रोमांचित होंगे कि प्राचीन भारतीय वैदिक गणित शिक्षण प्रस्तुति में वैदिक गणित अध्ययन पद्धत्ति में सम्पूर्ण गणितीय हल हेतु सोलह सूत्र एवं तेरह उपसूत्रों का ही अनुप्रयोग सुझाया गया है। तब विशाल भारत का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश के प्रथम विभाजन द्वारा प्राप्त अपना नवीन राज्य छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी छत्तीसगढ़ियाँ गणित अध्ययन में क्यों कर पीछे और अलग रह प्राते। छत्तीसगढ़ियों का गणित ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी मुखांतरित ही होते आ रहा है। आज तक लोक-साहित्य एवं शोध-साहित्य उल्लेखित नहीं हो पाया है। छत्तीसगढ़ियो का प्रमुख गणित अंक गणित बिसकुटक के नाम से जाना जाता है। बिसकुटक को आज जमा-जमाया तुकबंदी की श्रेणी में ही रखकर केवल मनोरंजन की पंक्ति मान लेते है। मैं सहज, सरल एवं रोमांचित करने वाले गणितीय मुहावरे, दोहे एवं कथनों की सहजता एवं वैज्ञानिकता पर ध्यान केन्द्रित कर पाया कि यह एकमात्र जमा-जमाया तुकबंदी नहीं है वरन पूर्ण आधुनिक गणित को समेटे हुये क घातीय त्रिपद व्यंजकों की नवीन प्रगुण की समिका देती परिलक्षित होती है। इसी क्रम में विश्लेषित प्रस्तुति- अपनी परिदृश्यों में आधुनिक बीजगणित, कम्प्यूटर, संकलन, व्यकलन, आवर्ती संख्या, गुणा, भाग की सहजता स्वीकार करने बाध्य करेगा। जादुई-वर्ग अध्ययन में नये सिरे से रोमांचित होते पायेंगे। गणित अध्ययन का एक उद्देश्य तर्क शक्ति बढ़ना भी है। मेरी कृति • गणित अध्ययन विकास में उनागर संख्यांकन पद्धत्ति छत्तीसगढ़ की एक देन प्रखण्ड-1 /3 अंकगणित सोपान में प्रयुक्त संख्याओं के अनुप्रयोग द्वारा 9,19,29 89,99 जैसे कठिन संख्याओं की तालिका (पहाड़ा) सरलीकृत करते हैं। योग, व्यवकलन, गुणा एवं भाग में चुने गये सरल सूत्रों का अनुप्रयोग तर्क शक्ति वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होगा। रंगीन जादुई वर्ग रचना में उत्पन्न प्रमेय (जादुई–वर्ग प्रमेय) r भुजिक बंध चौघडिया एवं तारांकित घिरिया का व्यापक प्रस्तुती नियम अवलोकित कर पायेंगे। जो कि तंत्र मंत्र एवं कवच यंत्र विज्ञान अध्ययन क्षेत्र में अपना विशिष्ट मार्गदर्शन प्रशस्त करता प्रतीत होगा। समान्तर चतुभुज लुकाछुपी (दर्शन एवं विलोपन ) की नवीन संरचना के साथ एक अद्भुत संख्या श्रेढ़ी योग-योग संख्या श्रेढ़ी [सरल शब्दों में श्रेढी पद क्रमांक r का मान अपने पूर्व के दो पद क्रमांक (r – 2) और (r – 1 ) के पद मानों का योग मान होता है । ] की प्रकार श्रृखला से परिचित होंगे। जिनके अध्ययन विस्तार में नये-नये आयामों में प्रस्तुति अवलोकित कर पायेंगे। इन नये आयामों के अध्ययन क्रम में विशिष्ट श्रेढ़ी का विस्तारित अध्ययन में गुणोत्तर सह योग. – योग संख्या श्रेढ़ी से अवगत होंगे गणित जगत में एक अद्भुत नवीन संख्या श्रेढ़ी सिद्ध होगा। छत्तीसगढ़ी उनागर संख्याकन पद्धत्ति का अध्ययन रोमांचकारी होगा। ऐसे विशद् गणित ज्ञान राशि के भण्डार को संजोयें हमारे पूर्वजी को कमतर माना जाना उनका अपमान ही होगा। अतः मेरा प्रथम उद्देश्य हमारे चूर्वजी गणित ज्ञान को उनके प्रति आत्मसाती सम्मान एवं नमन भाव में नव ज्योति स्वरूप उदित कराना है। उनागर लेखन क्रम में प्रस्तुत पंक्ति शिव दर्शन के माध्यम से हमे विडम्बनाओ के गूलामी को दर्शित कराना है। पंक्ति प्रभु दर्शन के माध्यम सेवा भाव को जागृत कराना है। लेख आध्यात्म गणित एवं एक मसीहा भीमराव अम्बेडकर के माध्यम से बढ़ते ऊँच-नीच के भाव को मिटाना है। लेख में सनातनी नहीं हूँ के माध्यम से विश्व शान्ति की कामना करता हूँ। माया है तो दुनिया है के भाव में नातिन -नाती एवं नवाशी – नवाशा के रिश्ते को श्रृंगारित किया है। आपका स्नेहाकांक्षी पंचराम केशरिया मोबाइल 9685267497 9589903045लेखन क्रम में प्रस्तुत पंक्ति शिव दर्शन के माध्यम से हमे विडम्बनाओं के गूलामी को दर्शित कराना है। पंक्ति प्रभु दर्शन के माध्यम सेवा भाव को जागृत कराना है। लेख आध्यात्म गणित एवं एक मसीहा भीमराव अम्बेडकर के माध्यम से बढ़ते ऊँच-नीच के भाव को मिटाना है। लेख में सनातनी नहीं हूँ के माध्यम से विश्व शान्ति की कामना करता हूँ। माया है तो दुनिया है के भाव में नातिन नाती एवं नवाशी – नवाशा के रिश्ते को श्रृंगारित किया है।